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Home»मध्यप्रदेश»जावरा»उच्च शिक्षा विभाग में चल रहा ‘सेटिंग’ का खेल, पात्र होते हुए भी 16 साल तक प्राध्यापक पदनाम से वंचित रहे वरिष्ठ सह प्राध्यापक
जावरा

उच्च शिक्षा विभाग में चल रहा ‘सेटिंग’ का खेल, पात्र होते हुए भी 16 साल तक प्राध्यापक पदनाम से वंचित रहे वरिष्ठ सह प्राध्यापक

EditorBy EditorDecember 15, 2025No Comments
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– जिन्होने अधिकारियों व बाबुओं से सेटिंग कर ली उन्है मिल गया पदनाम
– बगैर सेटिंग के कई वरिष्ठ प्राध्यापक रह गए वंचित, कनिष्ठों को मिल गया पदनाम
जावरा। उच्च शिक्षा विभाग में पदोन्नति प्रक्रिया की पारदर्शिता एक बार फिर सवालों के घेरे में है। एक वरिष्ठ सह प्राध्यापक ने विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि जिन सह प्राध्यापकों ने विभागीय अधिकारियों और बाबुओं से सेटिंग कर ली, उन्हें प्राध्यापक पदनाम मिल गया, जबकि पात्र होते हुए भी उन्हें 16 वर्षों तक जानबूझकर अटकाया गया।
रतलाम गल्र्स कॉलेज से सेवानिवृत सह प्राध्यापक अर्थशास्त्र प्रार्थी डॉ मदनलाल गांगले के अनुसार 13 जून 2018 को विभिन्न विषयों में प्राध्यापक पदनाम की सूची जारी की गई, जिसमें उनसे कनिष्ठ सह प्राध्यापकों के नाम शामिल थे, लेकिन योग्यता और समस्त पात्रताएं पूर्ण होने के बावजूद उनका नाम सूची से बाहर रखा गया। उन्होंने बताया कि इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने 21 जून 2018 को तत्कालीन प्राचार्य, शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रतलाम से आवेदन अग्रेषित कराकर अपर सचिव, उच्च शिक्षा मंत्रालय (वल्लभ भवन) एवं आयुक्त, उच्च शिक्षा विभाग (सतपुड़ा भवन) को स्पीड पोस्ट से सभी दस्तावेजों सहित आवेदन भेजा। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। डॉ गांगले ने बताया कि जब से सेवारत होकर जब अर्थशास्त्र विभाग में विभागाध्यक्ष थे, उसी दौरान उनसे कनिष्ठ 6 विभिन्न विषयों सह प्राध्यापकों को प्राध्यापक पदनाम दिया जा चुका हैं, जबकि वरिष्ठ होने के बाद भी उन्है पदनाम से वंचित कर दिया गया।
कई बार पत्राचार किए, लेकिन हर बार दबा दिए पत्र –
प्रार्थी का कहना है कि उन्होंने 6 सितंबर 2024, 23 अप्रैल 2024, 22 अक्टूबर 2024, 22 फरवरी 2025 तथा 30 अप्रैल 2025 को बार-बार स्मरण पत्र एवं आवेदन भेजे, लेकिन हर बार फाइलें दबाकर रख दी गईं। इस दौरान वे दिसंबर 2023 में सेवानिवृत्त भी हो चुके हैं, जिससे यह मामला केवल पदनाम तक सीमित न रहकर सम्मान एवं आर्थिक नुकसान से भी जुड़ गया है।
सेटिंग वालों का काम हो जाता हैं चुपचाप –
प्राध्यापक का आरोप है कि उच्च शिक्षा विभाग में ईमानदार और नियमों के अनुसार आवेदन करने वालों को वर्षों तक घुमाया जाता है, जबकि ‘सेटिंग’ करने वालों का काम चुपचाप हो जाता है। यही वजह है कि आज भी मुझे प्राध्यापक (अर्थशास्त्र) पदनाम नहीं दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिन कनिष्ठ सह प्राध्यापकों को पहले ही प्राध्यापक पदनाम मिल चुका है, उनके मामलों की तुलना की जाए तो भेदभाव और पक्षपात स्वत: उजागर हो जाएगा।
अब मुख्यमंत्री से की हस्तक्षेप की मांग –
पीडि़त प्राध्यापक ने अब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग करते हुए एक पत्र प्रेषित किया हैं, जिसमें डॉ गांगले ने समस्त पत्राचार, सेवा-पुस्तिका एवं प्रमाण पत्रों की छायाप्रतियां संलग्न कर दी हैं, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर उच्च शिक्षा विभाग में चल रही कथित सेटिंग व्यवस्था का पर्दाफाश हो सके और उन्हें न्याय मिल सके।
सीएम से डॉ गांगले ने की ये मांगे –
– प्राध्यापक पदनाम प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच
– कनिष्ठों को दिए गए पदनामों की फाइलों की समीक्षा
– दोषी अधिकारियों/कर्मचारियों पर कार्रवाई
– सेवानिवृत्ति पश्चात लंबित पदनाम से जुड़े आर्थिक लाभों का भुगतान

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