– सुजापुर माताजी मंदिर पर जारी नौ दिवसीय श्रीराम कथा में सांतवे दिन धनुष यज्ञ और सीता स्वयंवर
जावरा। स्वयं भु आद्यशक्ति पीठ श्रीअम्बेमाता मंदिर पहाड़ी सुजापुर पर अठारहवा ज्ञान गंगा महोत्सव के सांतवे दिन श्री भारत माता सेवाश्रम न्यास अध्यक्षा पूज्य साध्वी हेमलता दीदी सरकार ने सीता स्वयं वर और प्रभु श्रीराम और माता सीता के विवाह का प्रसंग सुनाया। साध्वी जी ने कहा कि श्रीराम जी के हर एक कर्म में मर्यादा और संस्कार छुपा हैं। नारी के सम्मान में राम जी यह नहीं देखते की यह राक्षसी हे या भक्ति मति माता अहिल्या है, नारी जाति समझ कर ताड़का को निज पद दे दिया, अहिल्या माता को पति लोक दिया, शिव धूषुष की लिए दस हजार राजा एक साथ धनुष उठाने लगे समाज में मुर्ख और बुद्धिमान पूर्व काल से ही है पर अगर इन दस हजार राजाओं ने धनुष उठा भी लिया होता तो विवाह के लिए कन्या के रूप में माता जानकी एक ही थी फिर झगड़ा होता पर बुद्धिमान होना आवश्यक हैं। सारे मुर्ख राजाओं पर बुद्धिमान श्रीरामजी ही पर्याप्त थे इसलिए दस मुर्ख साथ रखने के बजाय एक बुद्धिमान व्यक्ति रखना ही श्रेयस्कर होता हैं। इसलिए हर घर में श्री राम जैसे पुत्र की आवश्यकता हैं।
इन्होने लिया पौथी पूजन और आरती का लाभ –
कथा के सातवे दिन पौथी पूजन का लाभ सुनील रामप्रसाद राठौर ने लिया। अतिथि के रुप में श्रीमद् भागवत प्रवक्ता संत प्रीतमजी महाराज शुलालपुर, संत श्री योगी योगेश नाथ जी महाराज कालिका माता मंदिर जेठाना, हरिदास महाराज आक्यादेह, शिवानंद महाराज उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत समिति अध्यक्ष मनीष त्रिवेदी, सचिव राधेश्याम राठौड़, पूर्व अध्यक्ष पुनमचन्द राठौर, दातारसिंह सोलंकी आदि ने किया। सांयकाल आरती का लाभ भेरुलाल आंजना पुर्व सरपंच जैठाना ने लिया। संचालन पूर्व सरपंच सुभाष पांचाल ने किया।
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