– जावरा नगर पालिका में तो नपा नेता प्रतिपक्ष भी अब तक नहीं हुआ नियुक्त
– रतलाम जिले में 36 ऐसी समितियां जिनमें लंबे समय से नियुक्त नहीं हुए पदाधिकारी
जावरा। प्रदेश में भाजपा की सरकार बने करीब साल भर से अधिक का समय हो गया हैं, वहीं प्रदेश के नगरीय निकायों के चुनाव को भी करीब ढाई साल बीत गए हैं, लेकिन इतना समय बीतने के बाद भी भाजपा नगरीय निकायों में एल्डरमेन तक नियुक्त नहीं कर पाई हैं। ऐसे में भाजपा के ऐसे कई सदस्य जो बरसों से भाजपा का झंडा उठाते आ रहे हैं, उनके मन में कहीं ना कहीं एक दर्द है, जिसे वे चाहकर भी उजागर नहीं कर पा रहे हैं। हालही में संगठन के चुनाव भी सम्पन्न हुए हैं, जिनमें कई सदस्यों को काबील होने के बाद भी मौका नहीं मिला, उन्है नगरीय निकायों में एल्डरमेन, विधायक, सांसद प्रतिनिधि बनाकर उनकी कर्तव्य निष्ठा का ईनाम देना चाहिए, वहीं अकेले रतलाम जिले में ही 36 ऐसाी समितियां हैं जिनमें सरकार अपना प्रतिनिधि नियुक्त करती हैं, लेकिन ऐसा क्यों नहीं हो पा रहा हैं, सरकार इन समितियों में अपने प्रतिनिधि क्यों नियुक्त नहीं कर पा रही हैं, या नियुक्त करना नहीं चाह रही हैं यह तो भाजपा की सरकार जाने या फिर आला कमान ही जाने … ?
जिले की 36 समितियां ऐसी जिनमे नहीं हैं –
रतलाम जिले में बीते करीब 20 सालों से भाजपा को ही प्रतिनिधित्व मिला हैं, लेकिन इसके बाद भी जिले की 36 ऐसी समितियां हैं, जिसमें अब तक सरकार का कोई प्रतिनिधि नियुक्त नहीं हैं। जिले की जिला योजना समिति की उप समितियां अब तक नहीं बनी हैं, जिले की अत्योदय समितियां, जिला उपभोक्ता फोरम, रोगी कल्याण समितियां, परिवार परामर्श केन्द्र के साथ ही और भी कई ऐसी समितियां हैं, जिनमें अब तक कोई प्रतिनिधि नियुक्त नहीं किए गए हैं।
जावरा में तो नेता प्रतिपक्ष ही नदारत –
रतलाम जिले की जावरा नगर पालिका में भाजपा ने रानी पवन सोनी को नेता प्रतिपक्ष मनोनीत किया था। लेकिन विधानसभा चुनाव में रानी पवन सोनी के नेता प्रतिपक्ष पद से त्याग पत्र देने के बाद से यह पद रिक्त पड़ा हैं। करीब सवा साल बीतने के बाद भी भाजपा अब तक नेता प्रतिपक्ष के पद किसी को नहीं दे पाई हैं, क्या भाजपा के चुने गए पार्षदों में ऐसा कोई काबील पार्षद नहीं हैं…?, जिसे यह पद दिया जाए, या इस पद पर किसी को ना बैठाने के पीछे कोई ओर कारण हैं, यह तो भाजपा के पदाधिकारी ही जाने …. ? लेकिन नगर में इस बात को लेकर अलग अलग तरह की चर्चाएं आम हैं। चुने गए पार्षद नेता प्रतिपक्ष बनना तो चाहते हैं, लेकिन वे खुलकर इस बारे में कुछ बोल भी नहीं पा रहे हैं। वहीं जिन लोगों को टिकट से वंचित रखा गया था, उन्है एल्डर मेन या अन्य किसी समिति में प्रतिनिधि बनाकर भी ईनाम दिया जा सकता था, लेकिन अब तक ऐसा नहीं हुआ हैं।
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