जावरा। दान पूण्य का पर्व मकर संक्रांति मंगलवार को शहर में बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। सुबह से ही सनातन संस्कृति के अनुरुप लोगों ने मंदिरों में पहुंचकर पूजा अर्चना की, गुड़ तील के लड्डु और गजक की दुकानों पर भी लोगों की भीड़ देखी गई। सुहागन महिलाओं ने सुहाग की निशानियां बांटकर एक दुसरे को पर्व की बधाई दी। शहर के श्री गोपाल इफ्तेखार गौशाला और खाचरौद नाका स्थित जीवदया सोसायटी की गौशाल पर सुबह से की गायों को चारा खिलाने के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही। गौशालाओं पर गौ भक्तों का मेला लगा रहा। जहॉं दिनभर गौसेवकों द्वारा गायों को चारा, गुड़, हरी घास, फल, कपासिया आदि वस्तु के साथ गौ सेवा की एवं पूजन अर्चना का लाभ भी लिया।
शहर की सबसे पुरानी (124 वर्ष) गौशाला जो जावरा नगर की सम्प्रदायिक एकता की मिसाल पेश करती है। शहर एवं ग्रामीण क्षेत्र से हजारो भक्तों द्वारा तन-मन-धन से सेवा प्रदान की जाती है। ऐसा माना जाता है कि सनातन में गौमाता में 33 कोटी देवी देवताओं का वास समाहित रहता है। इस की सेवा से मनुष्य के पापों का नाश हो जाता है। इस अवसर पर जावरा कृषि उपज मण्डी के रिटायर्ड अधिकारी कैलाशचन्द्र श्रीवास्तव द्वारा अपनी पत्नी स्व.श्रीमती सुशिला श्रीवास्तव की स्मृति में 31 हजार रूप्ए की राशि गौ माता की सेवा में प्रदान की। इसी प्रकार नगर के अनेक दानदाताओं ने गौशाला की अभिनव योजना गौ ग्रास योजना का लाभ लिया। इस अवसर पर गौशाला के अध्यक्ष कैलाशनारायण विजयवर्गीय, सचिव अरविन्द पाटीदार, उपाध्यक्ष मोहन पटेल, अशोक सेठिया, गोपाल सेठिया, पवन मोदी, मनोहर पांचाल, प्रकाश मांदलिया, गोपाल मेड़तवाल, माया मोदी, नरेश ललवानी, किशोर शाकल्य, गायत्री प्रसाद मंडलोई, पी.टी. क्षीरसागर आदि ने अपनी सेवाएं प्रदान की।
गली मोहल्लों में गिल्ली डंडा तो छतों से उड़ी पतंग –
मकर संंक्राति पर्व के अवसर पर क्षैत्र में गिल्ली डंडे का खैल पारम्परिक रुप से खेला जाता रहा हैं, इसी कड़ी में मंगलवार को पर्व के अवसर पर शहर के मैदानों पर पुरुषों को गिल्ली डंडा खेलते देखा गया, वहीं गलियों और मोहल्लों में महिलाओं और युवतियों को इस खेल का आंनद लेते हुए देखा गया। वहीं शहर में पतंगबाजी भी देखने को मिली। शहर के आसमान से दोपहर से लेकर देर शाम तक रंग बिरंगी पतेंगे उड़ती हुई दिखाई दी। शहर के कोठी बाजार और जवाहरपथ स्थित पतंगों की दुकानों पर लोगों की भीड़ दिखाई दी। जहां 5 रुपए से लेकर 50 से 100 रुपए तक की पतंगे बच्चों से लेकर लेकर युवाओं के लिए बिक्री के लिए उपलब्ध रही। 
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