– उच्च शिक्षा विभाग की बजट शाखा प्रभारी की हठधर्मिता और मनमानी से परेशान सह प्राध्यापक
जावरा। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के गृहनगर उज्जैन कें उच्च शिक्षा विभाग में पदस्थ अधिकारी भी खुद ही सीएम ही समझ रहे हैं, यही कारण है कि इन अधिकारियों के जिम्मे जो काम हैं उसे भी समय पर पूर्ण नहीं कर रहे हैं, जिसके चलते कई लोग परेशान हो रहै हैं। ऐसा ही एक मामला बीते करीब चार से अधिक महिनों से चल रहा हैं। उच्च शिक्षा विभाग भोपाल में बजट शाखा प्रभारी जो कि उज्जैन की निवासी हैं उनकी मनमानी और हठधर्मिता से शासकीय कन्या महाविद्यालय रतलाम से सेवानिवृत हुए जावरा निवासी डॉ मदनलाल गांगले परेशान हैं। बजट शाखा प्रभारी द्वारा चार माह बाद भी अब तक डॉ गांगले के चिकित्सा देयक की 23 हजार 90 रुपए की राशि का बजट स्वीकृत नहीं किया हैं। जिसके चलते अब तक चिकित्सा देयक लंबित पड़ा हैं। इससे ऐसा प्रतित होता हैं कि आयुक्त उच्च शिक्षा का भी अपने अधिनस्त अधिकारियों व कर्मचारियों पर नियंत्रण नहीं हैं। यही कारण है कि काम को पेंडिग़ किया जा रहा हैं। जबकि शासकीय कन्या महाविद्यालय रतलाम द्वारा बजट हेतु कई पत्र बजट शाखा में प्रेषित कर दिए हैं, लेकिन इसके बाद भी अब तक मामला लंबीत ही पड़ा हैं।
डॉ गांगले ने उच्च शिक्षा विभाग में कार्यरत बजट शाखा प्रभारी पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए बताया कि प्रभारी की लापरवाही से उनके चिकित्सा देयक का बजट आवंटित नहीं किया गया हैं। जबकि विगत दिनों क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवायें उज्जैन द्वारा चिकित्सा देयको के भुगतान की राशि 23 हजार 90 के कार्योतर स्वीकृति आदेश देने के पश्चात, उक्त राशि का बजट आवंटित करने हेतु प्राचार्य शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रतलाम द्वारा दिनांक 13 फरवरी 25 को बजट शाखा आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग सतपुड़ा भवन भोपाल को एक पत्र भी प्रेषित कर दिया था, उसके बाद दिनांक 20 मार्च 25 को भी इसी विषय में प्राचार्य शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय रतलाम द्वारा बजट आवंटन हेतु उच्च शिक्षा आयुक्त को एक पत्र और प्रेषित किया गया हैं। सह प्राध्यापक डॉ गांगले का कहना हैं कि बजट शाखा प्रभारी व उनके अधिनस्त कर्मचारियों ने जान बुझकर 2024 के बजट से राशि नहंी दी हैं, जबकि चाहते तो वे मार्च में ही राशि का बजट आंवटन कर देते, लेकिन बजट आवंटित नहीं करने के पिछे उनकी क्या मंशा थी ये तो वहीं जाने .. ? बहरहाल डॉ गांगले ने आयुक्त उच्च शिक्षा से अपने अधिनस्त अधिकारियों व कर्मचारियों की लेटलतिफी को लेकर उनके विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई करने तथा शीघ्रताशीघ बजट स्वीकृत करने की मांग की हैं।

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