– माधवानंद एकेडमी पर हुआ मातृ सम्मेलन का आयोजन
जावरा। प्रेम की असली प्रतिमूर्ति तथा नि:स्वार्थ भाव से प्रेम की भावना माँ में होती है एक माँ ही अपनी संतान को अपनों से आगे देखना चाहती है। माँ वह शक्ति है जो सबका स्थान ले सकती है किंतु मां का स्थान कोई नहीं ले सकता। इसलिए भारतीय संस्कृति मां को ईश्वर से ऊपर दर्जा दिया है।
उक्त विचार श्री माधवानन्द एकेडमी पर आयोजित मातृ सम्मेलन में प्रधानाचार्य उषा श्रोत्रीय ने व्यक्त किए। मातृ सम्मेलन में अतिथि मेनका हाडा, आरती भावर ने अपने विचार रखते हुए कहा की मात्र स्कूल में बच्चों को भेजने से माता का दायित्व पूर्ण नहीं हो जाता बच्चों के जीवन में संस्कार, व्यवहार,अचार,विचार में माता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। मां का दायित्व परिवार में ज्यादा ही होता है। सम्मेलन का शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण कर दीप प्रज्जवलन कर किया। सम्मेलन में माता रामकुमार डोडिया, माया बामनिया ने गीत प्रस्तुत किये। संचालन भावना पुरोहित रचना कुशवाहा ने किया। आभार प्राची सोलंकी ने माना।
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