– ताल, रतलाम ग्रामीण और पिपलौदा में महज 16 से 17 प्रतिशत हुआ काम, हजारों रजिस्ट्रियां अब भी अधूरी
– कलेक्टर ने दी अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी
रतलाम। सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना को लेकर रतलाम जिले में राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। योजना के तहत स्वामित्व रजिस्ट्रियां तैयार करने का काम निर्धारित लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। हालात यह हैं कि तीन तहसीलों में अब तक महज 16 से 17 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है। सरकारी योजनाओं की प्रगति को लेकर बरती जा रही इस सुस्ती पर आखिरकार कलेक्टर अजय कटेसरिया का रुख सख्त हो गया है। कलेक्टर ने लापरवाही और धीमी प्रगति को गंभीरता से लेते हुए पिपलौदा, ताल और रतलाम ग्रामीण के तीन तहसीलदारों को चेतावनी पत्र जारी किए हैं। साथ ही साफ कर दिया है कि यदि काम की गति में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
तीन तहसीलों का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक –
समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़े राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली की तस्वीर बयां कर रहे हैं।
– तहसील ताल : कुल 17 प्रतिशत यानी 2,574 स्वामित्व रजिस्ट्रियां पूर्ण।
– तहसील रतलाम ग्रामीण : कुल 17 प्रतिशत यानी 4,255 रजिस्ट्रियां पूर्ण।
– तहसील पिपलौदा : कुल 16 प्रतिशत यानी 3,689 रजिस्ट्रियां पूर्ण।
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि तीनों तहसीलों में स्वामित्व योजना का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले इतनी कम प्रगति ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद कलेक्टर का सख्त रुख –
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से स्वामित्व रजिस्ट्री वितरण कार्यक्रम शीघ्र आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद कलेक्टर अजय कटेसरिया ने जिले में स्वामित्व रजिस्ट्रियों का काम वितरण कार्यक्रम से पहले शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए हैं। संबंधित तहसीलदारों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि अब केवल औपचारिक समीक्षा से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर परिणाम दिखाने होंगे।
सवाल यह भी : आखिर अब तक क्यों नहीं हुई लक्ष्य के अनुरूप प्रगति ? –
स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के मालिकाना हक को स्पष्ट करने और ग्रामीण परिवारों को कानूनी दस्तावेज उपलब्ध कराने की महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब योजना इतनी महत्वपूर्ण है तो संबंधित तहसीलों में काम की रफ्तार इतनी धीमी क्यों रही ? क्या मैदानी अमले की कमी इसकी वजह है या फिर अधिकारियों की कार्यप्रणाली में ही कहीं कमी रह गई? अब इन सवालों के जवाब भी प्रशासन को तलाशने होंगे। फिलहाल कलेक्टर की चेतावनी के बाद तीनों तहसीलदारों पर निर्धारित लक्ष्य पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि चेतावनी का असर काम की रफ्तार पर कितना पड़ता है या फिर प्रशासन को अगली कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ेगा।

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