– पिपलौदा में शिक्षा समिति की बैठक में खुली सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं की पोल
– 250 गणित की पुस्तकें अब तक नहीं मिलीं, कहीं पेयजल संकट तो कहीं रसोइयों का चार महीने से मानदेय बकाया
पिपलौदा/जावरा। नया शैक्षणिक सत्र शुरू हुए करीब पांच महीने बीत चुके हैं, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों की मुश्किलें अब भी खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। कहीं बच्चे किताबों के इंतजार में हैं, तो कहीं पात्र विद्यार्थियों को साइकिल तक नहीं मिल पाई है। सवाल यह है कि जब शैक्षणिक सत्र का आधा समय गुजरने को है, तब भी विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए जरूरी सुविधाएं समय पर क्यों नहीं मिल पा रही हैं? क्या जिम्मेदारों को बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य की चिंता नहीं है?
जनपद पंचायत पिपलौदा में बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को जनपद अध्यक्ष योगेंद्र सिंह सोलंकी की अध्यक्षता में आयोजित शिक्षा समिति की बैठक में सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं से जुड़ी कई गंभीर समस्याएं सामने आईं। बैठक में हुई चर्चा ने शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर दिए।
250 गणित की किताबें अब तक नदारद, कैसे होगी पढ़ाई ? –
बैठक में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों को नि:शुल्क पुस्तक वितरण की समीक्षा के दौरान गणित विषय की 250 पुस्तकें अब तक प्राप्त नहीं होने का मुद्दा उठाया गया। शैक्षणिक सत्र के पांच महीने गुजरने के बाद भी यदि विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं, तो उनकी पढ़ाई पर पडऩे वाले असर की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा ? पुस्तकें विद्यार्थियों की पढ़ाई का बुनियादी आधार हैं। ऐसे में समय पर किताबें नहीं मिलना केवल वितरण व्यवस्था की कमी नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की शैक्षणिक तैयारी से जुड़ा गंभीर विषय है। सवाल है कि इन पुस्तकों की आपूर्ति कब होगी और विद्यार्थियों को कब तक इंतजार करना पड़ेगा ?
साइकिल के इंतजार में विद्यार्थी, जिम्मेदारों की जवाबदेही कहां ? –
बैठक में कुछ विद्यार्थियों को साइकिल नहीं मिलने की समस्या भी सामने आई। साइकिल योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों को विद्यालय आने-जाने में सुविधा देना है, लेकिन यदि पात्र विद्यार्थी अब तक इससे वंचित हैं, तो योजना के क्रियान्वयन पर सवाल उठना स्वाभाविक है। समय पर साइकिल नहीं मिलने से विद्यार्थियों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में जरूरी है कि वंचित विद्यार्थियों की पहचान कर वितरण की स्थिति स्पष्ट की जाए और समस्या का शीघ्र निराकरण हो।
स्कूल में पेयजल तक नहीं, विद्यार्थियों की प्यास कौन बुझाएगा ? –
माध्यमिक विद्यालय मामटखेड़ा में पेयजल व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा भी बैठक में उठा। विद्यालय में पढऩे वाले बच्चों के लिए स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव चिंताजनक है। शिक्षा के मंदिर में यदि विद्यार्थियों को पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं है, तो व्यवस्था संभालने वाले जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। पेयजल कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं, बल्कि विद्यार्थियों की बुनियादी जरूरत है। इस समस्या का तत्काल समाधान किया जाना चाहिए, ताकि बच्चों को पूरे दिन पानी के लिए परेशान न होना पड़े।
चार महीने से रसोइयों को मानदेय नहीं, फिर व्यवस्था कैसे चले ? –
बैठक में मध्यान्ह भोजन योजना के रसोइयों को चार महीने से मानदेय नहीं मिलने का मामला भी सामने आया। स्कूलों में बच्चों के लिए भोजन तैयार करने वाले रसोइयों को समय पर भुगतान नहीं मिलना व्यवस्था की गंभीर समस्या को दर्शाता है। सवाल यह है कि लगातार काम करने के बावजूद रसोइयों को चार महीने तक मानदेय क्यों नहीं मिला? संबंधित विभाग को भुगतान में देरी के कारण स्पष्ट कर बकाया राशि जारी करने की दिशा में तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
देर से स्कूल पहुंचने वाले अतिथि शिक्षक पर कार्रवाई का प्रस्ताव –
कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के अतिथि शिक्षक भरत तिवारी के नियमित रूप से देर से विद्यालय पहुंचने का मुद्दा भी बैठक में उठाया गया। इस संबंध में कार्रवाई का प्रस्ताव रखा गया। वहीं, माध्यमिक विद्यालय भाकरखेड़ी के प्राचार्य गणेश मालवीय को बेहतर विद्यालय संचालन के लिए सम्मानित करने तथा अन्य आदर्श शिक्षकों का चयन कर राष्ट्रीय पर्व पर सम्मानित करने का प्रस्ताव भी सामने आया। यह पहल एक ओर बेहतर कार्य करने वाले शिक्षकों को प्रोत्साहित करने का संदेश देती है, वहीं दूसरी ओर विद्यालयों में समयपालन और जवाबदेही सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी रेखांकित करती है।
बैठक में उठे सवाल, अब कार्रवाई का इंतजार –
जनपद पंचायत पिपलौदा में आयोजित शिक्षा समिति की बैठक में जनपद अध्यक्ष योगेंद्र सिंह सोलंकी के साथ जनपद सदस्य भोपाल मालवीय, कौशल्या बाई, दिलीप निनामा एवं श्रीमती अंजना राठी उपस्थित रहे। बैठक में विद्यार्थियों की सुविधाओं में सुधार और विद्यालयों की समस्याओं के शीघ्र निराकरण पर जोर दिया गया। लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बैठक में समस्याएं सामने आने के बाद उनका समाधान कितनी जल्दी होगा? क्या विद्यार्थियों को गणित की 250 पुस्तकें और पात्र बच्चों को साइकिल समय पर मिल पाएगी? क्या मामटखेड़ा विद्यालय में पेयजल व्यवस्था सुधरेगी और रसोइयों को उनका बकाया मानदेय मिलेगा? शिक्षा समिति की बैठक में समस्याएं उठना पहला कदम है, लेकिन असली परीक्षा उनके समाधान की है। विद्यार्थियों का कीमती शैक्षणिक समय पहले ही बीत रहा है। अब जरूरत केवल चर्चा की नहीं, बल्कि समयबद्ध कार्रवाई और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की है।
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