– कलेक्टर का निरस्तीकरण आदेश दबाने का आरोप, जन संघर्ष समिति ने हाईकोर्ट जाने की चेतावनी दी
– 14 महीने से रजिस्ट्री बंद होने से लोग परेशान, प्रशासन पर नियम तोडऩे के आरोप
– एसडीएम के साथ केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री, मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर की हस्तक्षेप करने की मांग
जावरा। जावरा में भूतेड़ा से अर्निया मंडी तक बनने वाली 7 किलोमीटर सड़क को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। जन संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि सड़क निर्माण में ग्रीनफील्ड नियमों और भू-अर्जन कानून का पालन नहीं किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में शहर और व्यापार दोनों को भारी नुकसान हो सकता है। समिति ने केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितीन गडकरी, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, लोक निर्माण मंत्री राकेशसिंह सहित कई अधिकारियों को ज्ञापन भेजकर मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। बुधवार को जन संघर्ष समिति सदस्यों ने अनुविभागीय अधिकारी सुनिल जासवाल को सौंपा।
ग्रीनफील्ड रोड आई तो शहर के व्यापार पर पड़ेगा असर –
समिति का कहना है कि यदि इस सड़क को ग्रीनफील्ड रोड के रूप में बनाया गया तो रोड सेंटर से करीब 200 फीट तक निर्माण और व्यवसाय प्रभावित हो सकते हैं। इससे कई मकान, दुकानें और व्यापारिक गतिविधियां संकट में आ जाएंगी। समिति ने कहा कि जावरा पहले से बसा-बसाया शहर है, इसलिए यहां ग्रीनफील्ड नियम लागू करना शहर हित में नहीं होगा।
2010-11 में भी हुआ था विवाद –
समिति के अनुसार वर्ष 2010-11 में जावरा-उज्जैन रोड के लिए केवल टू-लेन सड़क के हिसाब से भूमि अधिग्रहण किया गया था। बाद में उसी जमीन पर फोरलेन बनाने की कोशिश हुई, जिसे निरस्त करना पड़ा था। अब फिर उसी तरह नियमों को बदलकर सड़क निर्माण की तैयारी किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
14 महीने से रजिस्ट्री बंद, लोग परेशान –
समिति ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हुसैन टेकरी से जोयो तिराहा तक जमीनों की खरीद-बिक्री और नामांतरण पर पिछले 14 महीनों से रोक लगी हुई हैं। लोग अपनी जमीन की रजिस्ट्री नहीं करा पा रहे हैं, जिससे व्यापार और आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। समिति का कहना है कि कलेक्टर का निरस्तीकरण आदेश आने के बाद भी प्रशासन मौखिक आदेश का हवाला देकर रजिस्ट्री शुरू नहीं कर रहा।
समिति की मुख्य मांगें –
1. शहर को उजडऩे से बचाया जाए : समिति ने मांग की है कि सड़क निर्माण ऐसा हो जिससे शहर, व्यापार और लोगों के घर सुरक्षित रहें।
2. ग्रीनफील्ड नियम हटाकर सिटी फोरलेन बनाया जाए : यदि सड़क शहर के बीच से गुजर रही है तो इसे सामान्य फोरलेन सड़क की तरह बनाया जाए।
3. नियमों का पूरा पालन हो : यदि ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट बनाया जाता है तो ओवरब्रिज, इंटरचेंज और एक्सेस कंट्रोल जैसे सभी नियम लागू किए जाएं।
हाईकोर्ट जाने की चेतावनी –
जन संघर्ष समिति ने साफ कहा है कि यदि नियमों के खिलाफ सड़क निर्माण किया गया तो मामला हाईकोर्ट तक ले जाया जाएगा। समिति का कहना है कि यह केवल सड़क का मामला नहीं, बल्कि जावरा शहर के भविष्य और हजारों लोगों के व्यापार व रोजग़ार से जुड़ा मुद्दा है।

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