– अतिक्रमण का नोटिस चश्पा करने के बाद भी नही हटाया अतिक्रमण
– लोग बोले जब आचार संहिता लगी थी तो नोटिस क्यों चिपकाया
जावरा। विधानसभा की पिपलौदा तहसील के रियावन में मेले मे हुए विवाद के बाद मामला थाने तक पहुंचा, जहां ग्रामीणो ने विवाद करने वाले व्यक्ति द्वारा गांव की शासकीय जमीन पर अतिक्रमण कर मकान बनाने की बात उजागर हुई, ग्रामीणों ने थाने को घेर का अतिक्रमण हटाने की मांग रखी, जिस पर गुरुवार को नायब तहसीलदार दल बल सहित मौके पर पहुंची और अतिक्रमण हटाने को लेकर नोटिस भी चस्पा कर दिया और शुक्रवार को सुबह अतिक्रमण हटाने की चेतावनी भी दे डाली, इसी बीच मामले में राजनैतिक हस्तक्षैप हुआ और अतिक्रमण को लेकर अधिकारियों के पास फोन आना शुरु हुए, इधर एक और संगठन ने भी मामले में हस्तक्षैप किया तो अधिकारियों को बैकफुट पर आना पड़ा, ऐसे में अधिकारियों ने मामले में लोकसभा चुनाव की आचार संहिता का बहाना बनाया और नोटिस चस्पा करने के बाद भी अतिक्रमण नहीं हटाया। जिससे ग्रामीणों में खासा रोष व्याप्त हो गा। मामले में तहसीलदार देवेन्द्र दानगढ़ का कहना है कि आचार संहिता लागू हैं, ऐसे में निर्वाचन आयोग की अनुमति के बगैर अतिक्रमण नहीं हटा सकते हैं, अब सवाल यह उठाता हैं कि जब अतिक्रमण हटाना ही नहीं था तो पहले नोटिस चस्पा क्यों किया और उस पर 17 मई की तारिख क्यों डाली गई।

अतिक्रमण नही हटने पर ग्रामीणों मे आक्रोश –
दूसरी और अतिक्रमण नही हटने से ग्रामीणों मे भी आक्रोश है, गांव के सरपंच संतोष सोनार्थी , जनपद सदस्य भानुप्रताप सिह राठौर, उपसरपंच वक्तावरसिह सिसौदिया, पुर्व जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि सुरेश धाकड़, सांवल सिंह राठौर, प्रकाश धनोलिया, कालुसिहभाटी, लक्ष्मण कांवरिया, रूगनाथ प्रजापत, गिरधारीलाल सेन, गंभीर सिंह, लक्षमण धाकड़, रमेश मैहता शीतल नाहर, सीताराम परमार ने बताया की प्रशासन ने शुक्रवार को उक्त अतिक्रमण को हटाने का आश्वासन दिया था, नोटिस भी लगाया था और दो दिन मे मुक्तिधाम का अतिक्रमण हटाने की बात भी कहीं थी लेकिन अब प्रशासन ने दबाव के चलते अपना निर्णय बदल दिया हैं। जिससे अब ग्रामीणों में प्रशासन पर से भरोसा उठा गया हैं, अब ग्रामीण उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी जवाबदारी प्रशासन की रहेगी।
आक्रोशित ग्रामीणों ने मामले में घेरा था कालूखेडा पुलिस थाना –


