– किसानों की आपत्ती के बाद पहले भूतेड़ा से होटल ज़ोयो तक की सडक़ हुई थी निरस्त, अब पुरा प्रोजेक्ट की अटका
जावरा/उज्जैन । सिहस्थ 2028 के पूर्व महाकाल की नगरी उज्जैन को देश के हर बड़े नगर से जोडऩे के लिए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस वे से कनेक्टीविटी बनाने के लिए उज्जैन से जावरा तक ग्रीन फिल्ड एक्सेस कंट्रोल्ड वे (फोरलेन) बनाए जाने की घोषणा जनवरी 24 में मुख्यमंत्री ने की थी। घोषणा के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू हुआ, टेंडर भी खुल गए, लेकिन काम शुरु होने से पहले ही प्रोजेक्ट का टेंडर रद्द हो गया हैं। जिसके चलते उज्जैन से जावरा तक का यह फोरलेन अब खटाई में पड़ गया हैं।
500 पेज की डीपीआर भेज, 13 कंपनियों ने डाले थे टेंडर –
मुख्यमंत्री डॉ यादव की घोषणा के बाद 102 किलोमीटर के इस नए फोरलेन के लिए सरकार ने मार्च 2024 में 5 हजार 17 करोड रु. स्वीकृत किए थे। इनमें 557 करोड़ सडक़ विकास निगम व 4 हजार 460 करोड रुपए राज्य सरकार के बजट से खर्च किया जाना तय हुआ है। इसके बाद एमपीआरडीसी ने 8 अप्रेल तक निविदा आमंत्रित की थी। जिसमें 13 कंपनियों ने टेंडर डाले थे। सरकार ने 500 पेज की डीपीआर बनाकर भी भेजी थी। टेंडर बंसल कंस्ट्रक्शन वर्क प्रॉ.लि. के नाम पर खुला था। नियम और शर्तों के अनुसार संबंधित निर्माण एजेंसी को दो साल में काम पूरा करना था, मगर काम शुरू होने से पहले सरकार ने अचानक टेंडर रद्द कर दिया। सरकार ने यह टेंडर क्यों रद्द किया है, इसके पीछे क्या कारण हैं, इसकी जानकारी किसी भी अधिकारी के पास नहीं हैं। एमपीआरडीसी के अधिकारियों के अनुसार टेंडर वरिष्ठ कार्यालय से रद्द हुआ हैं, उन्है केवल इतनी ही जानकारी हैं।
जमीन अधिगृहण का काम हो चुका था शुरु –
हाइवे बनने के बाद उज्जैन से दिल्ली या मुंबई तक का सफर 10 घंटे में पूरा किया जा सकेगा। सितंबर 2024 में उज्जैन के गांवों से जमीन अधिग्रहण शुरू हुआ था और मार्च 2025 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य था। मगर किसानों की तरफ से जमीन के बदले मुआवजा या रोड के डिजाइन को लेकर आई आपत्ति व तकनीकी कारणों के चलते काम शुरु नहीं हो पाया हैं। राजस्व अधिकारियों से चर्चा में बताया कि इस प्रोजेक्ट में जावरा के साथ ही नागदा और खाचरौद तहसील के कई गांव शामिल हैं। लेकिन किसानों की आपत्ती व मुआवजा राशि पर्याप्त नहंी मिलने के चलते यह प्रोजेक्ट शुरुआत से ही विवादों में रहा हैं।
जन संघर्ष समिति के प्रदर्शन के बाद भूतेड़ा से जावरा तक हुआ था निरस्त –
जावरा से मंदसौर फोरलेन स्थित होटल ज़्ाोयो चौराहे से भूतेड़ा एक्सप्रेस वे तक इस फोरलेन पर करीब 7 ओव्हरब्रिज बनना प्रस्तावित थे, ऐसे में इस सडक़ से लगे किसानों और व्यापारियों ने जन संघर्ष समिति के माध्यम से करीब तीन माह तक प्रदर्शन किया। कई लोग गिरफ्तार भी हुए। जब इस प्रदर्शन ने किसान आंदोलन का रुप लिया तब कहीं जाकर सरकार ने किसानों के इस आंदोलन को गंभीरता से लिया और जावरा के होटल ज़ोयो चौराहे से भूतेड़ा तक प्रस्तावित मार्ग को निरस्त करते हुए उज्जैन से भूतेड़ा एक्सप्रेस वे तक ही बनाने का निर्णय लिया था। लेकिन अब इस प्रोजेक्ट के टेंडर को सरकार ने ही रद्द कर दिया हैं। टेंडर रद्द करने के पीछे क्या कारण हैं, इसका खुलासा अभी नहीं हुआ हैं।



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