– प्रथम दिन हुई धर्मसभा, सामायिक दिवस के रुप में मना पहला दिन
जावरा। दिवाकर भवन जावरा पर चातुर्मास का शुभारंभ पुज्य गुरुदेव जैन दिवाकर श्री चोथमल जी मसा के मासिक सुदि तेरस के जाप एवं चालीसा के साथ तपस्वीनि विदुषी साध्वी श्री सरिता श्री जी म.सा.मधुर व्याख्यानी साध्वी श्री प्रियंका श्री जी म.सा. आदि ठाणा 2 के पावन सानिध्य में हुआ बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं द्वारा प्रथम दिन सामायिक दिवस के रूप में मनाया गया।
जाप के पश्चात धर्म सभा को सम्बोधित करते हुए महासती सरीताश्री जी ने फऱमाया कि जिनवाणी के शब्दों में शक्ति है वह अनमोल हैं प्रतिदिन श्रवण करने से आत्म कल्याण होता हैं लेकिन उसका फल व प्रभाव तब ही प्राप्त होता हंै। जब वह हमारे जीवन में उतरे जब तक हमारे जीवन में जिनवाणी आचरण बनकर नहीं उतरेगी तब तक हमारी आत्मा का कल्याण नहीं होगा जिनवाणी को हमें अपने जीवन में उतरना होगा तभी हमारा धर्म करना सार्थक होगा धर्म पर चलना बड़ा कठिन हैं। इसीलिए कहा गया है धर्म पर चलने वाला और धर्म की रक्षा करने वाला शूरवीर होता हंै। कायर कभी भी धर्म नहीं कर सकते धर्म को समझने के लिए हमारे अंदर तीन चीजों का होना आवश्यक है उत्साह,श्रद्धा और हिम्मत यदि हमारे अंदर उत्साह ही नहीं होगा तो हम धर्म के मार्ग पर कभी आगे नहीं बढ़ पाएंगे और यदि बढ़ भी गए तो बिना श्रद्धा के हमें प्रभु की प्राप्ति नहीं होगी क्योंकि बिना श्रद्धा के कंकर में शंकर कभी नहीं मिलेंगे श्रद्धा नहीं होगी तो हमें हर मूरत पत्थर की ही लगेगी और धर्म के सब मार्ग की कठिन डगर पर चलने के लिए मनुष्य में आत्म शक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है तभी हम अपनी आत्मा का पतन होने से रोक सकते हैं।
व्रत उपवास भी हुए प्रारंभ –
उपरोक्त जानकारी देते हुए श्री संघ अध्यक्ष इंदरमल टुकडिय़ां एवं वरिष्ठ उपाध्यक्ष ओमप्रकाश श्रीमाल ने बताया कि चार्तुमासिक गतिविधियां आषाढ़ सुदी तेरस से पूज्य गुरुदेव जैन दिवाकर चौथमलजी महाराज साहब के जाप एवं चालीसा के साथ ही प्रारंभ हुई जाप के लाभार्थी पारसमल सुमित शजी विरल बरडिया रहे। तपस्वी रत्न प्रकाशजी पितलीया ने 52 उपवास के प्रत्याख्यान महासतीजी से लिए प्रतिदिन आयम्बिल, एकाशन, उपवास की लड़ी प्रारंभ हो चुकी हैं। धर्म सभा का संचालन महामंत्री महावीर छाजेड़ ने किया।


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